छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब “नो-पॉलिटिक्स”; शाला विकास समितियां भंग….अब पालक ही होंगे अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, 1 लाख रुपये तक के खर्च का मिला पावर
रायपुर, 15 जून 2026। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य की सभी शाला विकास समितियों (VEC/SDMC) को भंग कर नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) गठित करने का निर्णय लिया है। नई समिति में बच्चों के माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता होंगे। समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन भी विद्यार्थियों के अभिभावकों में से ही किया जाएगा, जिससे स्कूल संचालन और विकास कार्यों में अभिभावकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
1 लाख रुपए तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार
नई गठित SMC को विद्यालयों में 1 लाख रुपए तक के निर्माण, मरम्मत और आवश्यक विकास कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार दिया जाएगा। इससे छोटी-छोटी आवश्यकताओं और मरम्मत कार्यों के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और स्कूल स्तर पर ही त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।
नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने पर जोर
शिक्षा विभाग ने नई समिति को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रखा है। SMC की प्रमुख जिम्मेदारियों में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना, नए विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाना, नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और शिक्षा की गुणवत्ता पर निगरानी रखना शामिल होगा।
मिड-डे मील और विद्यालय व्यवस्थाओं की निगरानी
समिति विद्यालय में संचालित मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर निगरानी रखेगी। साथ ही विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित समीक्षा भी करेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से स्कूलों की जवाबदेही और कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।
सभी जिलों को जारी हुए निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने नई SMC के गठन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय में निर्धारित नियमों के अनुसार समिति का गठन किया जाएगा और सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से स्कूल प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान तेजी से होगा और बच्चों की शिक्षा से जुड़े निर्णयों में अभिभावकों की भागीदारी मजबूत होगी।
हर शनिवार होगी अलग गतिविधियां
स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के मुताबिक, हर शनिवार प्रदेश के स्कूलों में गतिविधि दिवस मनाया जाएगा। जिसके दौरान बच्चों को महापुरुषों की जयंती, त्योहारों, मेलों, लोक संस्कृति और छत्तीसगढ़ की परंपराओं के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही कला, खेल, योग और अन्य रचनात्मक गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।
स्थानीय लोगों से भी सीखेंगे बच्चे
स्कूलों में स्थानीय कलाकारों, खिलाड़ियों और अलग-अलग क्षेत्रों के जानकार लोगों को बुलाया जाएगा। वे बच्चों को अपने अनुभव बताएंगे। वहीं कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार से जुड़े कौशल की भी जानकारी दी जाएगी।

